दीवाली कहे या दीपावली .यह खुशियों का त्यौहार है.सभी हर हाल में प्रभु की इच्छा से अपने किए हुए कर्मो के प्रभाव से फल प्राप्त करते है। फिर इस मंदी के दौर में भी दुखी क्यो.दुःख और सुख सब अपने मन की अवस्था को दर्शाते है।
सुख -दुःख तो एक छलावा है ,
सुख मानो तो सुख ही सुख है,दुःख मानो तो दुःख ही दुःख है।
तेरे दुःख का पारावार तेरे हाथ प्रिये।
जिंदगी कितने रंग दिखाती है .हर दिन हर पल इस परिवर्तनशील जगत में कुछ न कुछ नया इन्द्र धनुष प्रगट हो रहा है। बस आवश्यकता है तो इस बात की हमारी आँखों पर कौन सा चश्मा लगा हुआ है.जैसा चस्मा लगायेंगे जैसे मन में विचार होंगे वैसे ही नजर होगी और सारा नजारा वैसा ही दिखेगा.
