समय कभी ठहरता नही है .यह नदी के प्रवाह की तरह दिन रत बिना रुके भागता सा चला जा रहा है.जिंदगी इसके सामने बौनी सी नजर आती है.हम चाहकर भी इसे नही रोककर अपने मन की गति से जोड़ नही सकते
समय कभी ठहरता नही है .यह नदी के प्रवाह की तरह दिन रत बिना रुके भागता सा चला जा रहा है.जिंदगी इसके सामने बौनी सी नजर आती है.हम चाहकर भी इसे नही रोककर अपने मन की गति से जोड़ नही सकते