सूर्योदय होने से ही सवेरा नहीं होता है। हम जब अपने अन्दर के कलुषित विचारो को, भावनाओ को निकाल फेंकने के लिए दृढ संकल्प होते है उसी समय हमारे अन्दर प्रकाश जगमगा जाता है और उस प्रकाश के कारन अंधकार दूर होकर सवेरे की धुप निकल पड़ती है । आइये हम सब मिलकर ऐसे सवेरे का स्वागत करे.