Tuesday, October 6, 2009
प्रकृति की लीला बड़ी अनूठी है .बिन मांगे वो हमे धुप, हवा,पानी, फूल,पेड़,खनिज,लवण आदि देती है.पर हमे संतोष करने की आदत ही नही है। हम जो मिला उसे किस तरह प्लानिंग से खर्च करे वो नही सोचकर जो नही मिला है उसे पाने की कामना और उसे पाने के बाद कैसे खर्च करेंगे उसकी भी प्लानिंग कर डालते है। और जब वो नही मिलता है तो दुखी होते है.
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