Tuesday, October 6, 2009

प्रकृति की लीला बड़ी अनूठी है .बिन मांगे वो हमे धुप, हवा,पानी, फूल,पेड़,खनिज,लवण आदि देती है.पर हमे संतोष करने की आदत ही नही हैहम जो मिला उसे किस तरह प्लानिंग से खर्च करे वो नही सोचकर जो नही मिला है उसे पाने की कामना और उसे पाने के बाद कैसे खर्च करेंगे उसकी भी प्लानिंग कर डालते हैऔर जब वो नही मिलता है तो दुखी होते है.

Wednesday, August 19, 2009

खुली kitab

जिंदगी एक खली किताब की तरह होनी चाहिए .जब जो चाहे पढ़ ले.जितना हम जिंदगी को खुलकर जीते है,उतने ही हम अपने आपको हल्के महसूस करते है.जो मन में हो वाही वाणी पर हो और जो वाणी पर हो उसी अनुसार हमारे क्रियाकलाप हो.यानि मनसा वाचा कर्मना एक ही तरह हो। यह कहना और सुनना अच्छा लगता है पर इसे क्रिया रूप देने में बहुत परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जैसा की गीता में श्रीकृष्ण जी ने कहा है-अभासेंन तू कोंतैय..............

Tuesday, June 2, 2009

समय

समय कभी ठहरता नही है .यह नदी के प्रवाह की तरह दिन रत बिना रुके भागता सा चला जा रहा है.जिंदगी इसके सामने बौनी सी नजर आती है.हम चाहकर भी इसे नही रोककर अपने मन की गति से जोड़ नही सकते

Sunday, May 17, 2009

हम tum

हम तुम से जब मिले तो जमाना हमे भूल गया और हम ज़माने को भूल गए। मै को भूलकर ही हम बनते है हम में लगता है की मै और मेरापन को आत्मसात करने की हैसियत है.

Friday, October 24, 2008

दीवाली

दीवाली कहे या दीपावली .यह खुशियों का त्यौहार है.सभी हर हाल में प्रभु की इच्छा से अपने किए हुए कर्मो के प्रभाव से फल प्राप्त करते है। फिर इस मंदी के दौर में भी दुखी क्यो.दुःख और सुख सब अपने मन की अवस्था को दर्शाते है।

सुख -दुःख तो एक छलावा है ,

सुख मानो तो सुख ही सुख है,दुःख मानो तो दुःख ही दुःख है।

तेरे दुःख का पारावार तेरे हाथ प्रिये।

जिंदगी कितने रंग दिखाती है .हर दिन हर पल इस परिवर्तनशील जगत में कुछ न कुछ नया इन्द्र धनुष प्रगट हो रहा है। बस आवश्यकता है तो इस बात की हमारी आँखों पर कौन सा चश्मा लगा हुआ है.जैसा चस्मा लगायेंगे जैसे मन में विचार होंगे वैसे ही नजर होगी और सारा नजारा वैसा ही दिखेगा.

Friday, September 12, 2008

vamandwadasi

आज वामन द्वादसी है। भगवन विष्णु का वामन अवतार आज हुआ था
वामन भगवन देखने में छोटे थे लेकिन उनका कार्य बड़ा था