Tuesday, October 6, 2009
Wednesday, August 19, 2009
खुली kitab
Tuesday, June 2, 2009
समय
समय कभी ठहरता नही है .यह नदी के प्रवाह की तरह दिन रत बिना रुके भागता सा चला जा रहा है.जिंदगी इसके सामने बौनी सी नजर आती है.हम चाहकर भी इसे नही रोककर अपने मन की गति से जोड़ नही सकते
Sunday, May 17, 2009
हम tum
Friday, October 24, 2008
दीवाली
दीवाली कहे या दीपावली .यह खुशियों का त्यौहार है.सभी हर हाल में प्रभु की इच्छा से अपने किए हुए कर्मो के प्रभाव से फल प्राप्त करते है। फिर इस मंदी के दौर में भी दुखी क्यो.दुःख और सुख सब अपने मन की अवस्था को दर्शाते है।
सुख -दुःख तो एक छलावा है ,
सुख मानो तो सुख ही सुख है,दुःख मानो तो दुःख ही दुःख है।
तेरे दुःख का पारावार तेरे हाथ प्रिये।
जिंदगी कितने रंग दिखाती है .हर दिन हर पल इस परिवर्तनशील जगत में कुछ न कुछ नया इन्द्र धनुष प्रगट हो रहा है। बस आवश्यकता है तो इस बात की हमारी आँखों पर कौन सा चश्मा लगा हुआ है.जैसा चस्मा लगायेंगे जैसे मन में विचार होंगे वैसे ही नजर होगी और सारा नजारा वैसा ही दिखेगा.
Friday, September 12, 2008
vamandwadasi
वामन भगवन देखने में छोटे थे लेकिन उनका कार्य बड़ा था
